रोज़ा का बयान पार्ट 1 ||roza ka bayan

roza ka bayan,roza ka mahina

 हदीस
हज़रत अबू हुरैरा रज़ि अल्लाह तआला अन्हु ने कहा कि रसूले करीम सल्लल्लाहो तआला अलेही वसल्लम ने फरमाया कि जब माहे रमज़ान शुरू होता है तो आसमान के दरवाजे़ खोल दिए जाते हैं।

और एक रिवायत में है कि जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और दोजख के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और शयातीन ज़ंजीरों में जकड़ दिए जाते हैं।

और एक रिवायत में है रहमत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। (मुस्लिम)


हज़रत शेख अब्दुल हक मोहद्दिस देहलवी रहमतुल्लाह अलैह इस हदीस के तहत तहरीर फरमाते हैं!

यानी आसमान के दरवाजे खोल दिए जाने का मतलब है मुसलसल (लगातार) रहमत का भेजा जाना और बगैर किसी रूकावट के बारगाह ए इलाही में आमाल का पहुंचना और दुआ का कुबूल होना!

और जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाने का माना है नेक आमाल की तौफीक और  हुसने कुबूल अता फरमाना!

 और दोज़ख के दरवाजे बंद किए जाने का मतलब है रोजे़दारों के नुफूस को ममनूआत ए शरिया की आलूदगी से पाक करना और गुनाहों पर उभारने वाली चीजों से निजात पाना और दिल से लज़्ज़तों के हुसूल की ख्वाहिशात का तोड़ना 

और शयातीन को ज़ंजीरों में जकड़ दिए जाने का माना है बुरे ख्यालात के रास्तों का बंद हो जाना।


हदीस
हज़रत अबू हुरैरा रदि अल्लाह तआला अन्हु ने कहा कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो तआला अलेहि वसल्लम ने फरमाया के जो शख्स ईमान के साथ सवाब की उम्मीद से रोज़ा रखेगा तो उसके अगले गुनाह बख्श दिए जाएंगे।

और जो ईमान के साथ सवाब की नियत से रमजान की रातों में कयाम यानी इबादत करेगा तो उसके अगले गुनाह बख्श दिए जाएंगे।

और जो ईमान के साथ सवाब हासिल करने की गर्ज़ से शबे क़द्र में कयाम करेगा उसके अगले गुनाह बख्श दिए जाएंगे। (मुस्लिम)


हदीस
हज़रते अबू हुरैरा रज़ि अल्लाह तआला अन्हु कहते हैं कि हुजूर सल्लल्लाहो तआला अलेही वसल्लम ने फरमाया कि जब माहे रमजान की पहली रात होती है तो शयातीन और सर्कश जिन कै़द कर लिए जाते हैं।

और जहन्नम के दरवाजे़ बंद कर दिए जाते हैं फिर (रमज़ान भर) उनमें से कोई दरवाजा खोला नहीं जाता और जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं तो उनमें कोई दरवाजा बंद नहीं किया जाता।

और मुनादी पुकारता है के ऐ खैर की तलब करने वाले तवज्जो हो और ऐ बुराई का इरादा रखने वाले बुराई से बाज़ रह और अल्लाह बहुत से लोगों को दोज़ख से आजाद करता है और हर रात ऐसा होता है। (तिरमिज़ी)

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